सीमांचल में टिकट कारोबार में उलझी कांग्रेस–राजद, तो एमआईएम को दिया बढ़त का वरदान
सीमांचल के हालिया चुनावों में महागठबंधन, विशेषकर कांग्रेस और राजद, को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसका प्रमुख कारण टिकट वितरण में की गई मनमानी, भीतरघात और नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएँ रहीं। एमआईएम ने मुस्लिम बहुल सीमांचल में अपने प्रत्याशियों को उतारकर मुस्लिम वोटों को विभाजित किया, जिससे एनडीए को अप्रत्याशित लाभ मिला। राजद–कांग्रेस के कई समर्पित नेताओं को नजरअंदाज कर बाहरी और धनबल वाले नेताओं को टिकट देने से संगठन में असंतोष पनपा। कांग्रेस नेताओं पर टिकट व्यापार और भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिनकी गूंज दिल्ली तक पहुँची। परिणामस्वरूप महागठबंधन के कई प्रभावशाली नेता जनता के समर्थन से वंचित हो गए। कांग्रेस नेता गौतम वर्मा ने हार के लिए बिहार प्रदेश नेतृत्व और प्रभारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मजबूत संगठन की कमी और टिकट वितरण के घिनौने खेल ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाया। उन्होंने भविष्य में राजद से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने की सलाह दी।
सीमांचल (अशोक/विशाल)
भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की खिलाफत करने का दंभ भरने वाली हैदराबादी सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ए आई एम आई एम ने बिहार के सीमांचल में मुस्लिम प्रत्याशियों के विरोध में चुनावी जंग लड़ा और सबसे बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र सीमांचल की परंपरागत एनडीए विरोधी मिजाज़ पर कुठाराघात करते हुए सीमांचल स्थित अपने प्रभाव वाले पांच सीटों से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को कामयाब करा लिया।
इस क्रम में उन पांचों सीटों से चुनाव लड़े महागठबंधन वाले राजद कांग्रेस के प्रत्याशियों की पराजय का कारण बने एम आई एम ने सीमांचल के अलावा अन्य कई क्षेत्रों की सीटों पर भी राजद कांग्रेस के प्रत्याशियों के वोटों की कटिंग कराया और एन डी ए गठबंधन की जीत को कामयाब बनाया।
कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि न सिर्फ अपनी बेहतरीन चुनावी व्यवस्थाओं की वजह से बल्कि इस पार्टी ने अपने चुनावी जन सभाओं में जितनी भी बद्दुआएं कांग्रेस और राजद को दिया , वे , सभी कांग्रेस और राजद को भुगतने पड़ गए हैं। उन बद्दुआओं की वजह से अथवा कांग्रेस और राजद के अन्दर के विभीषणों की कारगुज़ारियों की वजह से कांग्रेस और राजद के सिटिंग विधायकों को बेटिकट कर दिए जाने से और धन दौलत के बूते गैर कांग्रेसी नेताओं में रेवड़ी की तरह चुनावी टिकटें वितरित कर दिए जाने के कारण जो परिणाम कांग्रेस और राजद को हांसिल हुआ , उसकी वज़ह से ये दोनों पार्टियां हाशिए पर खिसकती नज़र आ रही है।
तुर्रा यह कि एन डी ए गठबंधन की भाजपा और जदयू से अलग होकर कांग्रेस में शामिल हुए नए नए नेताओं को कांग्रेस की चुनावी टिकट से नवाजा गया।
दूसरी ओर विक्षुब्ध कांग्रेसी नेताओं ने पोस्टर जारी कर शकील अहमद खान,अल्लाबरू और राजेश राम सरीखे नेताओं को दलाल के रूप में प्रचारित किया।
लिहाजा , इस बात की गूंज कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक पहुंच गई और उसके परिणामस्वरूप बिहार के प्रभार से अल्लाअर्जुन की बर्खास्तगी हो गई और शेष उपरोक्त नेताओं को चुनाव के दौरान अपने वोटों की ताकत से जनता ने बर्खास्त कर मुंह के बल गिरा दिया।
आम आवाम में चर्चा है कि इस सीमांचल में हुई राजद कांग्रेस की बर्बादी के लिए इन पार्टियों के नेता ही जिम्मेवार हैं। जनता की नब्ज़ टटोले विना कांग्रेस राजद के नेताओं ने जो मनमानी की उसका फलाफल कांग्रेस राजद को भुगतना पड़ा।
लेकिन , यहां पर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि सीमांचल क्षेत्र के किशनगंज संसदीय क्षेत्र में भाजपा एनडीए को तरजीह नहीं मिली।
विभीषणों ने आने वाले 2030 के चुनाव में अपनी खातिर टिकटों का जुगाड कायम रखने के लिए इस टर्म भर के लिए एम आई एम को बढ़ावा दिया गया , इस सच्चाई को भी झुठलाया नहीं जा सकता है।
पूर्णिया जिला कांग्रेस कमिटी के पूर्व महासचिव सह मुख्य प्रवक्ता अरूणाभ भास्कर उर्फ गौतम वर्मा ने पार्टी आलाकमानों से मांग किया है कि अब सबसे पहले पार्टी वैसे नेताओं और प्रभारियों को पार्टी से निलंबित करें जिन्होंने चुनावी टिकट के बंटवारे में घिनौना खेल करके ना सिर्फ़ पार्टी के समर्पितों को विक्षुब्ध बनाया था बल्कि अपने घिनौने खेल की गाथाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाकर जनता में बरकरार रही कांग्रेस की ईमानदार छवि को सशंकित और बदनाम किया है।
बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की आश्चर्यजनक पराजय के लिए कांग्रेस के बिहार प्रदेश के नेताओं और राष्ट्रीय नेताओं व प्रभारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पूर्णिया जिला कांग्रेस पार्टी के नेता गौतम वर्मा ने कहा कि चुनाव के दौरान बिहार में कांग्रेस के मजबूत संगठन की जरूरत को नजरअंदाज किया गया और इस वजह से बिहार में सशक्त कांग्रेस संगठन का बड़ा अभाव पूरे चुनाव काल तक महसूसा जाता रहा।
उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस के मनमानीपूर्ण चुनावी टिकट के वितरण को लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई और कार्यकर्ताओं में चुनाव सम्पन्न होने तक आक्रोश व्याप्त था।
कांग्रेस नेता गौतम वर्मा ने कहा कि पूर्णिया जिले में बतौर कांग्रेस प्रभारी मनमानी करने वाले कांग्रेस प्रभारियों द्वारा लिफाफेबाजी किए जाने के कारण जिले भर के कांग्रेस महकमे में कांग्रेस के प्रति उदासीनता कायम हुई थी और कुछ जगह इस वजह से भीतरघात भी हुए।
कांग्रेस नेता गौतम वर्मा ने कहा कि बीते चुनाव के परिणामों से जिस तरह से इस सीमांचल क्षेत्र में कांग्रेस के भविष्य और अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हुआ है उसके मद्देनजर कांग्रेस पार्टी सबसे पहले राजद से अलग हो कर अकेले चुनाव मैदान में कूदने की रणनीति पर काम करे क्योंकि इस बार राजद की संग सोहबत में रहने के कारण कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा है और टिकट वितरण में किए गए घिनौने खेल ने तो पार्टी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।



