कनीज फातमा का सवाल: पूर्णिया में स्वजातीय समर्थन क्यों टूटा?
किशनगंज में मुस्लिम समुदाय ने स्वजातीय एकजुटता दिखाकर अपने उम्मीदवारों को सफल बनाया, लेकिन पूर्णिया सदर विधानसभा में वैसा समर्थन समाजसेविका और निर्दलीय प्रत्याशी कनीज फातमा को नहीं मिला। नगर निगम चुनाव में उन्हें मुस्लिम वोटरों का भारी समर्थन मिला था, पर इस विधानसभा चुनाव में वही समुदाय उनका साथ छोड़ता दिखा। लगभग 90 हजार मुस्लिम मतदाता होते हुए भी उन्हें अपेक्षित वोट नहीं मिले, जबकि उनकी छवि ईमानदार, संघर्षशील और मिलनसार नेता की रही है। चुनाव के दौरान उनके खिलाफ यह अफवाह फैलाई गई कि उन्हें वोट देने से भाजपा जीत जाएगी और वे भाजपा समर्थित प्रत्याशी हैं। अंतिम वक्त में इस भ्रामक प्रचार ने उनका नुकसान किया। कनीज फातमा इस उदासीनता से हैरान हैं और स्वजातीय समाज से पूछ रही हैं कि वैसा समर्थन यहाँ क्यों नहीं मिला जैसा किशनगंज में मिला। इसके बावजूद वे निराश नहीं हैं और मेयर पद के लिए तैयारी में जुटी हुई हैं।
सीमांचल (अशोक/विशाल)
देश के राजनीतिक मानचित्र में बिहार राज्य के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र किशनगंज में बहुसंख्यक मुस्लिम समुदाय ने इस बार के विधान सभा चुनाव में जिस तरह से अपने स्वजातीय प्रेम के मिजाज़ के अनुकूल चुनाव परिणामों से बिहार की विपक्षी पार्टी कांग्रेस और राजद को चौंकाने वाला काम किया , उस तरह का स्वजातीय प्रेम पूर्णिया जिला मुख्यालय स्थित पूर्णिया सदर विधानसभा क्षेत्र में क्यों नहीं किया , यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
पूर्णिया नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर के पिछले चुनाव के दौरान डिप्टी मेयर पद के लिए पूर्णिया सदर के मुस्लिम समुदाय ने जिस तरह से बगैर किसी आर्थिक खर्च कराए ही पहली बार बतौर डिप्टी मेयर उम्मीदवार सामने आई समाजसेविका कनीज फातमा उर्फ चांदनी की झोली में आश्चर्यजनक वोटों की ताकत का बौछार कर दिया था , वैसा , उसी तरह की आस में इस बार के विधान सभा चुनाव में भाग्य आजमाने कूद पड़ी उसी कनीज फातमा उर्फ चांदनी को बतौर निर्दल प्रत्याशी क्यों नहीं भरपूर वोटों की सहायता से नवाजा गया , यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
सवाल खड़ा हुआ है कि पूर्णिया सदर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 90 हजार से अधिक स्थापित मुस्लिम समुदाय के वोटरों ने अपने समुदाय के आगामी राजनीतिक भविष्य को संवारने की दिशा में बीते विधानसभा चुनाव के दौरान अपने समुदाय के नेता को उभार प्रदान करने में अपनी दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई।
जबकि उनके समुदाय से निर्दल चुनाव मैदान में डटी महिला प्रत्याशी कनीज फातमा की किसी भी प्रकार की कोई बदनामी नहीं रही है और व्यक्तिगत रूप से इलाके की जनता उन्हें नगर निगम चुनाव के दौरान से ही मृदुभाषी मिलनसार व्यवहारिक और संघर्षशील महिला समाजसेवी नेता के रूप में जानती पहचानती आई है।
महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इस बार के विधान सभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही कनीज फातमा की निर्दल उम्मीदवारी की आहट पाकर राजनीतिक पार्टियों में हलचल सी स्थिति पैदा हो गई थी और राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों के ओंठ कंठ सुखने लगे थे।हड़कंप इस तरह मचे थे कि चुनावी प्रक्रिया के प्रारंभिक दौर नामांकन की प्रक्रिया के अंतर्गत ही कनीज फातमा के नामांकन पत्र को रद्द कराने के लिए पूरी ताकत से राजनीतिक पार्टियों ने जोर लगा दिया था लेकिन अधिकारी की निष्पक्षता और ईमानदारी की बदौलत कनीज फातमा के नामांकन पत्र सुरक्षित रह गए थे और उसके बाद कनीज फातमा पूरी शिद्दत से मुस्लिम समुदाय के वोटरों के बीच घूम घूम कर अपने लिए वोटों की भीख मांगती रहीं और तुर्रा यह कि कनीज फातमा के ऐसे प्रयासों को देख सुनकर अन्य सभी प्रत्याशियों के होश फाख्ता होते रहे थे। लेकिन , परिणाम घोषित होने के बाद बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया कि अंतिम समय में आखिर किस विधि के परिणाम स्वरूप उस निर्दल मुस्लिम महिला प्रत्याशी कनीज फातमा को सीधे हाशिए पर चला जाना पड़ा और चर्चाओं में कनीज फातमा की इस स्थिति को लेकर भारी विस्मय व्यक्त किया जाने लगा।
स्वयं कनीज फातमा भी अपने स्वजातीय वोटरों द्वारा अचानक उनसे मुंह मोड़ लिए जाने की चुनावी राजनीति की घटना से सकते में आ गई हैं और अपने द्वारा अपने समुदाय को एक जुट करने के प्रयास में नाकामयाब होने के कारण यही महसूस कर रही हैं कि , आखिर , उनके क्षेत्र के मुस्लिम समाज ने वैसी एकजुटता अपनी बिरादरी का नेता स्थापित करने में क्यों नहीं दिखाया , जिस तरह की एकजुटता मुस्लिम समुदाय के वोटरों ने मुस्लिम समुदाय के उम्मीदवारों को जिताने में किशनगंज में दिखाया और राजद कांग्रेस की अनदेखी कर हरेक विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम समुदाय का अपना नेता स्थापित करने की ललक को साकार किया।
कनीज फातमा से इस संबंध में पूछने पर पता चला कि चुनाव के वक्त उनके विरूद्ध अफवाहें फैलायीं गई थीं कि कनीज फातमा को वोट देने से भाजपा जीत जाएगी और कनीज फातमा भाजपा द्वारा चुनाव में खड़ी की गई हैं।
कनीज फातमा ने कहा है कि वह निराश नहीं हुई हैं और अपने समाज पर आज भी भरोसेमंद हैं और अपनी चुनावी तैयारियों में अभी भी जुटी हुई हैं क्योंकि उन्हें आने वाले अगले नगर निगम के चुनाव में सीधे मेयर पद का चुनाव लड़ना है और मेयर पद का चुनाव लड़ने की तैयारी उन्होंने अभी से ही इसलिए शुरू कर दी हैं क्योंकि वह सामान्य ईमानदार नागरिक हैं और कोई धन्नासेठ नहीं हैं कि चुनाव की घोषणा के साथ ही नगर निगम चुनाव में कूद पड़ेंगी और नोटों के बल पर चुनाव जीतने का दंभ भरेंगी।



