सीमांचल में टिकट का खेला: सियासी सस्पेंस, थ्रिल और बगावत से गरमाया विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव में सीमांचल की राजनीति इस बार थ्रिल, इमोशन और सस्पेंस से भरपूर दिखाई दे रही है। टिकट बंटवारे को लेकर महागठबंधन और एनडीए दोनों खेमों में भारी असंतोष और उथल-पुथल मची रही। कहीं दिन में घोषित प्रत्याशी का नाम शाम तक बदल दिया गया तो कहीं सिटिंग विधायकों को दरकिनार कर नए चेहरों को उतार दिया गया। कांग्रेस, राजद, जदयू और भाजपा सभी दलों में असंतोष की लहर दौड़ गई। अमौर में जदयू के सबा जफर का नामांकन रद्द होने और साबिर अली को टिकट मिलने से हड़कंप मच गया। भाजपा नेता किशोर जायसवाल ने कसबा से इस्तीफा देकर निर्दलीय नामांकन किया, जबकि वरुण सिंह ने बहादुरगंज से जन सुराज पार्टी जॉइन कर ली। कांग्रेस में भी सिटिंग विधायकों के टिकट कटने से नाराज़गी चरम पर है — अररिया, बहादुरगंज, किशनगंज और कसबा की सीटों पर नए नामों की घोषणा से दलीय संकट गहरा गया। वहीं बायसी से राजद विधायक सैयद रुकनुद्दीन अहमद का टिकट काटकर छह बार के पूर्व विधायक अब्दुस सुब्हान को उम्मीदवार बनाया गया है, जो 1985 से लगातार चुनावी मैदान में उतरते रहे हैं। 2020 में AIMIM के रुकनुद्दीन यहाँ से जीते थे। इसी तरह किशनगंज के कोचाधामन विधानसभा से आरजेडी ने मास्टर मुजाहिद आलम को टिकट देकर मौजूदा विधायक का टिकट काट दिया है।

सीमांचल में टिकट का खेला: सियासी सस्पेंस, थ्रिल और बगावत से गरमाया विधानसभा चुनाव

सीमांचल (अशोक/विशाल)

  • कई सीट पर महागठबंधन की उम्मीदवारी अटकी पड़ी तो कहीं अदल बदल के चले खेल
  • सांसद तारिक अनवर ने जताया भारी ऐतराज
  • एन डी ए के सारे उम्मीदवार घोषित : लेकिन सीट शेयरिंग से चुके प्रत्याशियों का निर्दल नामांकन दाखिला जारी
  • भाजपा के लोकप्रिय नेता किशोर जायसवाल ने भी इस्तीफा देकर कसबा से दाखिल किया निर्दल नामांकन
  • भाजपा के दूसरे नेता वरूण सिंह ने भी इस्तीफा देकर थामा बहादुरगंज से जन सुराज का टिकट
  • अमौर सीट से कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी जलील मस्तान ठोक रहे ताल
  • जहां से जदयू के सवा जफर ही हैं जदयू प्रत्याशी:पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली ने समस्त अफवाहों का खंडन पूर्णिया स्थित लेसी सिंह के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया

विधान सभा चुनाव की उम्मीदवारी के संदर्भ में सीमांचल की राजनीतिक सरजमीं पर गोते लगाने वाली राजनीतिक दलों ने जिस तरह के थ्रिल , इमोशन और सस्पेंस का खेल किया , उससे दलीय नेताओं से लेकर क्षेत्र की जनता तक ही नहीं वल्कि मीडिया जगत में भी बड़े अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गए।

कांग्रेस और राजद की ओर से उम्मीदवारों की सेटिंग में तमाम पॉलिटिकल नजरियों से अलग थलग की सिनेमाई थ्रिल इमोशन और सस्पेंस के खेल कांग्रेस और राजद ने ही नहीं वल्कि जदयू भाजपा वाली एनडीए गठबंधन ने भी शुरू किए।

चुनाव में खड़े होने वाले पार्टी नेताओं को नॉमिनेशन के दौरान उधेड़बुन की स्थितियों से जूझने की स्थिति का सामना करना पड़ता रहा।

चर्चा है कि पूर्व में कभी भी इस तरह की हल्कानियों का सामना पार्टी जनों को नहीं करना पड़ा था , इसलिए , अबकी बार की अकस्मात परेशानियों से उन्हें जूझने की नौबत आई।

तुर्रा यह कि सुबह में जिन उम्मीदवार के नाम की घोषणा हुई , शाम से रात तक में उनकी जगह अन्य उम्मीदवार के नाम पर पार्टी की ओर से मुहर लगाई गई और कमोवेश ऐसा ही खेल चुनाव की घोषणा के बाद से अभी तक खेला जाता रहा।

अमौर की सीट पर पूर्व जदयू विधायक सबा जफर द्वारा जदयू से नामांकन दाखिल करने के बाद वहां से जदयू की टिकट ले कर पूर्व राज्य सभा सांसद साबिर अली के आ धमकने की खबर का रविवार को मंत्री लेसी सिंह के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के समक्ष स्वयं पूर्व राज्य सभा सांसद साबिर अली द्वारा ही कर दिया गया।

इस मौके पर साबिर अली ने कहा कि पूरे अमौर के एन डी ए महकमें में हलचल मच गया था , जिसे पार्टी मुख्यालय के द्वारा ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि इसका खंडन पूर्णिया जाकर तुरत करें ।

लेसी सिंह और साबिर अली ने घोषणा कर पत्रकारों को बताया कि अमौर विधानसभा क्षेत्र की सीट से पूर्व विधायक सबा जफर ही जदयू के एन डी ए प्रत्याशी हैं और उनके नामांकन हो चुके हैं।

घनघोर आश्चर्य की बात तो यह हुई कि जिन सीटों के सिटिंग विधायक राजद के रहे थे , वहां से कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा कर दी गई और जहां पर कांग्रेस के ही सिटिंग विधायक आसीन रहे , वहां पर राजद खेमें से आयातित नेता को लाकर कांग्रेस का उम्मीदवार बना दिया गया।

कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि राजद , कांग्रेस के साथ साथ भाजपा, जदयू ने भी अपने अपने कुनबे के भीतर विरोध का स्वर अलापने का अवसर मुहैया कराना शुरू किया।

हर ओर दलीय नेताओं में हाहाकार की स्थिति पैदा होने लगी और चर्चा है कि ऐसा करने में कोई कोर कसर राजद कांग्रेस के साथ साथ जदयू  और भाजपा द्वारा बांकी नहीं छोड़ा गया।

जिसके परिणामस्वरूप ही कसबा विधानसभा क्षेत्र के सर्वाधिक लोकप्रिय भाजपा नेता किशोर जायसवाल ने भाजपा से इस्तीफा देकर निर्दल प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल कर दिया।

जानकारों के अनुसार , कांग्रेस विधायक की सिटिंग सीट अररिया में पहले पूर्व विधायक जाकिर अनवर का नाम कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में घोषित किया गया और उसके काफी देर बाद , देर शाम में वहां के सिटिंग विधायक आविदुर्रहमान के नाम पर ही कांग्रेस की उम्मीदवारी का मुहर लगाया गया।

इसी तरह से बहादुरगंज की सीट पर काबिज़ राजद विधायक मोहम्मद अंजार नईमी के बाबजूद कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में वहां से प्रोफेसर मुसब्बिर आलम के नाम पर कांग्रेस प्रत्याशी का मुहर लगाया गया।

किशनगंज सदर की सीट के सिटिंग कांग्रेस विधायक इजहारूल हुसैन को बेटिकट कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए किशनगंज जिला राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष सह पूर्व विधायक कमरूल होदा को बतौर नया कांग्रेस उम्मीदवार घोषित किया गया।

जबकि पूर्णिया की कसबा सीट के लगातार कांग्रेस सिटिंग विधायक आफाक आलम को भी इस बेटिकट करके कांग्रेस ने नए उम्मीदवार स्वरूप पूर्व प्रखंड प्रमुख इरफान आलम को घोषित किया गया।जिसको लेकर सिटिंग कांग्रेस विधायक आफाक आलम ने संपूर्ण कांग्रेस महकमा पर सवाल दर सवाल खड़ा कर दिया।

कसबा विधानसभा क्षेत्र के तीन बार के सिटिंग कांग्रेस विधायक आफाक आलम ने इस मामले में अपनी पार्टी के तीन बड़े नेताओं को आरोपित करते हुए कहा है कि ऐसा सिर्फ पैसों के खेल के जरिए हुआ है।

जबकि उसी कसबा की सीट पर एन डी ए गठबंधन से जुड़े लोजपा रामविलास के द्वारा एक पूंजीपति होटल व्यवसायी को बतौर उम्मीदवार उतारे जाने के बाद पूर्णिया जिला हम पार्टी के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र यादव ने स्पष्ट आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेता के बेटे ने भारी कीमत लेकर उनकी सीट को बेच दिया और उन्हें बेटिकट करा दिया।

जबकि दूसरी ओर उसी कसबा की सीट से कांग्रेस की टिकट के दावेदार रहे इरफान आलम ने भी जब वैसा ही रोना बिलखना शुरू किया तो आश्चर्य जनक तरीके से अचानक इरफान आलम को कांग्रेस की ओर से कसबा की सीट से उम्मीदवारी प्रदान कर दिया गया।