बायसी चुनाव 2025: चिरैया और बैरिया की ऐतिहासिक एकजुटता से बदला सीमांचल का सियासी समीकरण
बायसी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति चार दशकों से दो गांव—चिरैया और बैरिया—के राजनीतिक घरानों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। कभी चिरैया गांव के नेता जीत दर्ज करते रहे तो कभी बैरिया के। परंतु इस बार का चुनाव ऐतिहासिक बन गया है, क्योंकि दोनों प्रतिद्वंदी घराने अब एकजुट हो गए हैं। राजद ने चिरैया गांव के पूर्व मंत्री हाजी अब्दुस सुबहान को उम्मीदवार बनाया, जबकि बैरिया गांव के निवर्तमान विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद ने टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी निष्ठा निभाते हुए उनके समर्थन में उतरने का निर्णय लिया। इस अभूतपूर्व एकता ने पूरे सीमांचल की राजनीति में हलचल मचा दी है और विपक्षी दलों, खासकर भाजपा प्रत्याशी विनोद यादव, की रणनीति को चुनौती दे दी है। वहीं जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार शाहनवाज आलम का कहना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता के डर से यह एकजुटता बनी है। अब देखना यह है कि जनता इस नई राजनीतिक एकता को कितना स्वीकार करती है।
सीमांचल (अशोक/विशाल)
बायसी विधान सभा क्षेत्र में विगत चालीस पैतालीस वर्षों से सिर्फ दो राजनीतिक घरानों का पारापारी वर्चस्व स्थापित होता रहा है , जिसके कारण उन दोनों राजनीतिक घरानों की पहचान उनके गांवों के नाम से स्थापित रही है।
जी हां , बायसी की राजनीति में चिरैया और बैरिया नामक बायसी अनुमंडल मुख्यालय के दो गांव वर्षों से इसलिए चर्चित हैं कि पारापारी कभी चिरैया गांव का राजनीतिक घराना विधायक निर्वाचित होता आ रहा है तो कभी बैरिया गांव का राजनीतिक घराना विधायक बन कर क्षेत्र का ताड़नहार बनता रहा है।
अब तक के प्रायः विधान सभा चुनावों में इन दोनों गांवों के राजनीतिक घरानों में ही आमने सामने की चुनावी टक्कर होती आई हैं जिसमें कभी चिरैया वाले अपनी जीत दर्ज कराते तो कभी बैरिया वाले।
चर्चा है कि इस तरह से संपूर्ण बायसी विधान सभा क्षेत्र की राजनीति विगत चालीस पैतालीस वर्षों से चिरैया और बैरिया के बीच ही घूमती रह गई है।
क्षेत्र के लोगों ने कई बार इन दोनों इलाकों के राजनीतिक तिलिस्म को तोड़ने की मंशा ठानी और इसके अलावा इन दोनों घरानों की उम्मीदवारी की टक्कर में कई कई उम्मीदवारियां भी दर्ज कराईं , चुनावें लड़े , लेकिन , परिणाम कभी चिरैया गांव के पक्ष में जाता था तो कभी बैरिया गांव के पक्ष में।
लेकिन , इस बार पहला अवसर लोगों को हाथ लगा कि दोनों घरानों के एक ही दल राजद में साथ साथ रहने के कारण इस बार राजद द्वारा चिरैया गांव वासी राजद के पूर्व विधायक सह पूर्व मंत्री हाजी अब्दुस सुबहान को टिकट दे दिया गया तो बैरिया गांव वासी निवर्तमान सिटिंग विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद स्वतः स्फूर्त बेटिकट हो गए और चुनाव लड़ने से वंचित हो गए।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने योग्य रहने और क्षेत्र की जनता की बेशुमार मांग रहने के बाबजूद इस बार बैरिया गांव वासी निवर्तमान राजद विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद ने चिरैया गांव वासी अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंदी सह वर्तमान राजद प्रत्याशी हाजी अब्दुस सुबहान के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने से खुद को इसलिए रोक लिया कि देश और राज्य की वर्तमान राजनीतिक हालातों के बीच उन्होंने अपना चुनाव लड़ना उचित नहीं समझा और दूसरी ओर उन्हें अपनी पार्टी में पार्टी के प्रति वफादार बनकर रहने में ही अपना आगामी राजनीतिक भविष्य सुनहरा नज़र आया।दूसरे , राज्य में महागठबंधन की सरकार बनने पर बिना चुनाव लड़े मंत्रिमंडल में स्थान मिलने का भरोसा भी बरकरार है।
लिहाजा , इस बार बायसी विधान सभा क्षेत्र का यह पहला चुनावी मौका है जब चिरैया गांव वासी राजद प्रत्याशी हाजी अब्दुस सुबहान की जीत को सुनिश्चित कराने की दिशा में बैरिया गांव वासी निवर्तमान विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद ने न सिर्फ चुनाव मैदान में कूदने से परहेज़ किया वल्कि उन्होंने चिरैया गांव वासी राजद प्रत्याशी की जीत को सुनिश्चित कराने की दिशा में चिरैया गांव वासी राजद प्रत्याशी से गले मिलकर संयुक्त ताकतों के आधार पर इस बार का चुनाव फतह करने का जोरदार अभियान शुरू किया।
जाहिर सी बात है कि चिरैया गांव वासी राजद प्रत्याशी की जीत को सुनिश्चित कराने की दिशा में पूरी शिद्दत से जुट गए बैरिया गांव वासी निवर्तमान विधायक सैयद रूकनुद्दीन अहमद को देखकर संपूर्ण विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं वल्कि सम्पूर्ण बायसी अनुमंडल क्षेत्र के दोनों विधान सभा क्षेत्रों बायसी से अमौर तक की विपक्षी राजनीतिक दलों में हाहाकार मच गया है।
बायसी विधान सभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी विनोद यादव इस बार के चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी के रूप में अकेले हाजी अब्दुस सुबहान की उम्मीदवारी को देखकर जितने प्रसन्नचित हुए थे , दोनों की चुनावी युगलबंदी को लेकर उतने ही परेशान हो रहे हैं।
जबकि , बायसी विधान सभा क्षेत्र से जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार शाहनवाज आलम की प्रतिक्रिया है कि जन सुराज पार्टी से बायसी सीट से उनके द्वारा उम्मीदवारी प्रस्तुत कर दिए जाने के कारण चिरैया से बैरिया तक वाले दोनों राजनीतिक घरानों को भारी भय समा गया कि अगर जन सुराज पार्टी का उम्मीदवार शाहनवाज आलम ही इस बार का चुनाव जीत जाएगा तो निःसंदेह वह अपने पैर को बायसी की सरजमीं पर इस तरह अंगद की भांति जमा देगा , जिसे अगले भविष्य के चुनावी राजनीति में ना चिरैया गांव वासी हाजी अब्दुस सुबहान उखाड़ पाएगा और ना ही वह खुद यानि बैरिया गांव वासी सैयद रूकनुद्दीन ही उक्त पांव को उखाड़ पाएंगे।
लिहाजा , बताया जाता है कि इस वजह से ही इस बार के विधान सभा चुनाव में सैयद रूकनुद्दीन अहमद ने हाजी सुबहान को समर्थन सहयोग देना शुरू कर दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि बायसी विधान सभा क्षेत्र की जनता दोनों राजद घराने की एकजुटता के प्रति अपने समर्पण भाव को किस हद तक कामयाब बनाती है।



